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अररिया में जमीन रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का बड़ा मामला, जमाबंदी बदलने के आरोप में 55 लोगों पर केस दर्ज

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अररिया के डुमरिया गांव में जमीन जमाबंदी में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। किसान की शिकायत पर 55 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिसमें अंचल कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।

अररिया/आलम की खबर:बिहार के अररिया जिले से जमीन रिकॉर्ड में कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। फुलकाहा थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव में जमीन की जमाबंदी और ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगाते हुए एक किसान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 55 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामले में भू-माफिया के साथ-साथ नरपतगंज अंचल कार्यालय से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। शिकायतकर्ता किसान बैद्यनाथ बहरदार ने आरोप लगाया है कि उनकी खतियानी जमीन के रिकॉर्ड में कथित रूप से गलत तरीके से बदलाव कर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए।

दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोप लगाया गया है कि जमीन की जमाबंदी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर छेड़छाड़ की गई। शिकायत में कहा गया है कि ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में बदलाव करने के लिए सरकारी डिजिटल हस्ताक्षर प्रणाली का भी कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।

मामले में तत्कालीन अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मियों समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्राथमिकी में तत्कालीन सीओ शम्भू प्रकाश, अंचलाधिकारी उत्तम राहुल, वर्तमान सीईओ रविंद्र कुमार, राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार राय, जमीउर रहमान सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन रिकॉर्ड में बदलाव के बाद संबंधित लोगों ने जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। इस दौरान खेत में लगी फसल को नुकसान पहुंचाने और विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

किसान की ओर से पुलिस को कुछ दस्तावेज और वीडियो फुटेज भी उपलब्ध कराए गए हैं। पुलिस इन सभी साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

यह मामला सामने आने के बाद इलाके के किसानों में भी चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के कागजात और ऑनलाइन रिकॉर्ड में गड़बड़ी होने से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

जमीन से जुड़े मामलों में ऑनलाइन रिकॉर्ड व्यवस्था को पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन इस तरह के आरोप सामने आने के बाद डिजिटल भूमि रिकॉर्ड की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

आरोप है कि यदि सरकारी डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग हुआ है तो यह गंभीर मामला है, क्योंकि इससे कई लोगों की जमीन और संपत्ति से जुड़े अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए पूरे मामले की गहराई से जांच जरूरी मानी जा रही है।

फुलकाहा थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है। पुलिस जमीन से जुड़े दस्तावेजों, जमाबंदी रिकॉर्ड, ऑनलाइन एंट्री और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

अररिया के पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार ने बताया कि मामला पुलिस के संज्ञान में आया है। प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच के दौरान जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं को खंगाल रही है। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

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जमीन से जुड़े मामले बिहार में लंबे समय से संवेदनशील विषय रहे हैं। जमीन के कागजात में किसी भी तरह की गड़बड़ी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। डिजिटल भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन अगर इसमें हेरफेर के आरोप सामने आते हैं तो इसकी गंभीर जांच जरूरी हो जाती है।

अररिया के इस मामले में पुलिस जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। आरोप सही पाए जाने पर दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है, वहीं निर्दोष लोगों को भी निष्पक्ष जांच के जरिए न्याय मिलना चाहिए।

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